History of Water Purification (part-1)

जल शुद्धिकारण का इतिहास (भाग-1) –
आज से 500 साल पहले विश्व एवं भारत में इतनी ज्यादा प्रदूषण का विस्तार नहीं था। वर्षा का जल जब भूजल के सतह पर जाकर मिलती तो भूस्तर ही पानी में मिला प्रदूषण को सोख लेती थी। परन्तु जैसे-जैसे मानव का मानसिक विकास हुआ, अपने दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाली महत्वपूर्ण पेयजल को शुद्ध करके पीने की सोंच का विकास हुआ। क्यों कि अक्सार लोग जब एक जगह से दूसरे जगह जाते तो पानी का स्त्रोीत अलग-अलग प्रकार की होती थी। पीने का पानी का प्रयोग कुआं, तालाब, जलाशय एवं नदियों से ही करते थे।


प्रदूषित पानी पीने से बीते समय में अक्सर संक्रामक बिमारी डायरिया, हैजा, टायफाईड, मलेरिया, फाइलेरिया, पेचिस एवं कब्जे आदि अन्य् कई प्रकार की बिमारियां हो जाती थी।
आपको जानकर आश्चीर्य होगा कि सर्वप्रथम विश्व‍ एवं भारत में पानी शुद्धिकरण का प्रमाण 2000 ईसा पूर्व में शुरू हो गया था। रोम में 200–300 ईसा पूर्व पानी शुद्ध करने की परंपरागत प्रणाली की शुरूआत हुई। 500-1500 ईस्वी् के बीच पानी शोधन की प्रक्रिया का अंत माना जाता है क्योंकि रोमन साम्राज्य के पतन के बाद वहां दुश्मनों की सेना ने सब कुछ नष्ट कर दिया था। जलशुद्धिकरण का पारंपरिक यंत्र नष्ट हो चु‍का था। इस अवधि को जलशुद्धिकरण प्रक्रिया का अंधकार युग के नाम से भी जाना जाता है।
सर फ्रांसिस बेकॉन ने 1627 ई. में समुद्र जल को बालू के द्वारा (sand filtration process) जलशोधित करने की विधि का खोज किया। इसके बाद दो डच अनुसंधानकर्त्ता एन्टोनैइ, वान ल्युवेनहॉक ने 1670 ई. में माइक्रोस्कोप से पानी में मौजूद धातु कणों को पता करने पर अनुसंधान आरंभ किया । इसके बाद 1676 ई. में वान ल्युकवेनहॉक ने पानी में मौजूद माइक्रोऑगनिज्‍म का पता लगाया।


सन् 1854 ई. में पानी जनित रोग ‘कौलरा’ का पता लगाया गया एवं इन अवधि में जल को शुद्ध करने के लिए बालू जलशोधन विधि एवं क्लोरीन का प्रयोग होने लगा था। क्लोरीन से जल का स्वाद एवं गंध में परिवर्तन आने के कारण 1890 ई. में अमेरिका में वृहद पैमाने पर बालू जल शोधन विधि का प्रयोग होने लगा था। इस अवधि तक जल शोधन की उक्ते प्रक्रिया के अलावा और कोई विशेष अनुसंधान नहीं हो पाया । हालांकि इस समय तक कई प्रकार के जल जनित रोगों का पता लगया जा चुका था ।


सन् 1903 ई. में वाटर साफ्टनिंग विधि से जल शुद्धिकरण का आविष्कार हुआ।
सन् 1914 ई. के बाद पानी शुद्धिकरण प्रक्रिया में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ। नगर निगम द्वारा पेयजल का मानक एक्ट का प्रावधान किया गया। इस समय जल शोधन का आरंभ तीन मुख्य चीजों द्वारा किया जाने लगा यथा – WOOL, SPONGE & CARBON .

अगला लेख भाग – 2 को अवश्य पढ़ें …………. धन्यवाद ।

12 Replies to “History of Water Purification (part-1)”

  1. Every man goes from one place to another, then the water changes, it all knows that there is a difference in the TDS of every water. It is not possible everywhere that it only meets the mineral water. We know that if any water remains true then water Warming only

  2. Every man goes from one place to another, then the water changes, it all knows that there is a difference in the TDS of every water. It is not possible everywhere that it only meets the mineral water. We know that if any water remains true then water Warming only

    1. Dear Reader
      Hope you are read my blog in HINDI & Eng. language. Your web page not redable for me due to other language.Thanks for reading.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *